जब वो मुम्बई में उड़ता पंजाब बना रहे थे,
हर ऐक्शन के पहले गांजा, चरस सुलगा रहे थे।
असल में उड़ रही थी मुम्बई फ़िल्म इंडस्ट्री
स्क्रीन पर वो पंजाब को नशे में उड़ा रहे थे।
......
धर्मेन्द्र मन्नु
समय
किसके पास है…
सबके पास
बस वही है
दिन के
चौबीस घंटे…
सप्ताह के
सात दिन…
साल के
बारह महीने……
और कुछ
अनिश्चित से साल
ज़िन्दगी के…।
dharmendra mannu...
काले लबादों को
जला दो
सूरजमुखी को सूरज
से मिला दो
कलियों को
खिलखिलाने दो
इश्क के गीत
गाने दो।
घरों में घुटता है
इश्क, ऐसे
रिश्तों के मकड़
जाल में
पिंजरे के पंछी के
पर खोलो परवाज़ दो
गुणसूत्रों के दोष को
मिटाने दो
कलियों को
खिलखिलाने दो
इश्क के
गीत गाने दो...
धर्मेंद्र मन्नु